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सबसे अधिक एक्यूप्रेशर के पाइंट
तीन आमाप, मध्यम, बड़ा और अधिक बड़ा

परीक्षण में सबसे अच्छा!
यंत्र मैट को, स्वीडिश पत्रिका ‘क्रॉप एवं सजाल’
(‘शरीर एवं आत्मा’) के द्वारा सर्वोत्कृष्ट के रूप में चुना गया था|

अपने यंत्र मैट का प्रयोग करना शुरू करें

यंत्र मैट के एक नए उपयोक्ता होने के नाते, हम यह सिफारिश करते हैं कि आप अपने शरीर को धीरे धीरे अभ्यस्त कराएं|

 

सामान्य: 
ध्यान से, यंत्र मैट पर लेट जाएं| पहले 3-5 मिनिटों तक आप संभवतः थोड़े से दर्द का अनुभव करेंगे| यह दर्द आखिरकार कम हो जाएगा| शांत रूप से गहरी सांस लें और आराम करें| सारे संपर्क पाइंट पर अपने शरीर के वजन को बराबर रूप से डालें| यदि आपको लगे कि बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है तो अपने शरीर और मैट के बीच एक पतला कपड़ा बिछाएं (जैसे कि, तकिये का गिलाफ, चद्दर या सूती की टी-शर्ट)|धीरे धीरे आप अधिक अभ्यस्त हो जाएंगे| फिर आप इस रक्षात्मक कपड़े के बिना यंत्र मैट का प्रयोग कर सकते हैं|

 

मनुष्य होने के नाते, हमारे दर्द को सहन करने का स्तर भिन्न होता है और कुछ चिकित्सीय अवस्थाएं दर्द के प्रति हमारी संवेदनशीलता को बढ़ा सकती हैं| लेकिन वह लोग भी यंत्र मैट का प्रयोग कर सकते हैं जिनके दर्द को सहने की क्षमता बहुत कम होती है| तब यह और भी जरूरी हो जाता है कि आप अपने शरीर के लक्षणों के प्रति ध्यान दें एवं आपके द्वारा अनुभव किए जाने वाले दर्द की मात्रा यदि बहुत बढ़ जाए तो यंत्र मैट एवं अपनी त्वचा के बीच कुछ बिछाएं| 

 

एक चीज अधिकांश प्रयोक्ताओं में आम है, वे सब इसका प्रयोग करने के बाद शांति का अनुभव करते हैं – संतुष्टि का अनुभव|

 

दिन 1 से 4- हम लगभग 10 मिनट की सिफारिश करते हैं| 
बीच दोपहर में इसका प्रयोग करने की कोशिश करें| कुछ लोग इसका प्रयोग करने के बाद थक जाते हैं और कुछ लोग पहली बार के बाद सो जाते हैं| कुछ लोगों को प्रयोग करने के बाद ही तुरंत ऊर्जा मिलती है| जब आप मैट का बार-बार प्रयोग करना शुरू करेंगे तो यह लक्षण ठीक हो जाएंगे|

 

दिन 5 से 14 – हम लगभग 20 मिनट की सिफारिश करते हैं|
सोने के समय मैट का प्रयोग करें| यदि आप सो जाएं, तो भी ठीक है| यह आवश्यक है कि अपने आप को घड़ी के द्वारा सम्मोहित न होने दें| सबसे आवश्यक चीज है आराम करना| इस बात का महत्व नहीं है कि आपने मैट पर कुल 20 मिनट से अधिक समय बिताया है या नहीं | जब आप जागें तो मैट को हटा दें और वापस सो जाएं| आशापूर्वक, आप आखिरकार यह अनुभव करेंगे कि जागने के बाद आप अधिक ताजा अनुभव करते हैं और दिन बिताने के लिए आपके पास अधि चुस्ती-फुर्ती (कार्य शक्ति) होती है|

 

14 दिनों के बाद इस समय तक आप यंत्र मैट के बारे में बहुत कुछ जान जाएंगे और यह भी जाने जाएंगे कि आप पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है| इसके बाद आप मैट पर अपने द्वारा बिताए जाने वाले समय की अवधि को बढ़ा सकते हैं| 20-40 मिनट बिताने का प्रयास करें| कुछ लोग, थोड़े-थोड़े समय के लिए यंत्र मैट से विराम (ब्रेक) लेते हैं, जब कि अधिकांश लोग, अधिक से अधिक प्रभाव प्राप्त करने के लिए इसका रोज प्रयोग करते हैं| ऑटोइम्यून विकार से ग्रस्त लोगों में यह देखा गया है कि, रोज इसका प्रयोग करने से उनको सबसे अच्छे परिणाम मिलते हैं, अच्छा होगा यदि आप इसका सुबह प्रयोग करें|



मूल मुद्राएं

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मुद्रा 1: पीठ
एक समतल सतह पर लेटें| यदि संभव हो तो, अपनी गर्दन के नीचे एक तकिया लगाएं| यह रीढ़ की हड्डी के एक्यूप्रेशर पाइंट को उद्दीप्त करता है और यह पीठ की समस्याओं को कम कर सकता है|

 

 

मुद्रा 2: पेट
जैसे तस्वीर में दिखाया गया है वैसे अपने पेट के ऊपर लेटें| यह आपके चयापचयन को सुधार सकता है एवं मध्यपट और श्वास प्रश्वास संबंधी मांसपेशियों के खींचाव को ढीला कर सकता है|

 

 

मुद्रा 3: जबड़ा
ध्यान से लेटें और अपने गाल को मैट पर रखें| यदि यह बेआराम लगे तो, एक पतले चद्दर का प्रयोग करें| यह आपके गरदन और जबड़े में खींचाव को ढीला कर सकता है|

 

 

मुद्रा 4: बैठे हुए
आप एक साधारण कुर्सी पर इस मैट का प्रयोग कर सकते हैं, या लेट जाएं और मैट को अपने नितम्ब के नीचे रखें| यह मुद्रा, आपके कमर के क्षेत्र और नितम्ब के क्षेत्र में खींचाव को ढीला कर सकता है|

 


विश्राम का कार्यक्रम:
 इन मूल मुद्राओं के साथ आप अपने आवश्यकताओं के अनुसार अपने विश्राम का कार्यक्रम बना सकते हैं| उदाहरण के लिए: 10 मिनट के लिए पीठ की मुद्रा + 10 मिनट पेट की मुद्रा + 10 मिनट बैठने की मुद्रा + 5 मिनट बांया गाल + 5 मिनट दांया गाल + 10 मिनट पीठ की मुद्रा|

 

शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को स्रावित किया जाता है, और अपने प्रोग्राम के अंत में पनी पीना एक अच्छा विचार है| आराम करने और पुनः ठीक होने के लिए अपने आप को समय दें|